Adhyatmik Shri Mad Bhagwat Geeta

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May 03 - 09, 2022 01:00 AM To 05:00 AM
  • Organiser
    PRAJAPITA BRAHMA KUMARIS ISHWARIYA VISHWA VIDYALAYA (PORSA SABZI MANDI ROAD) ( RELIGIOUS WING )
  • Category
    Cultural Event, Rally
  • Project
    Shrimad Bhagwad Gita Program (Azadi Ka Amrit Mahotsav)
  • Occasion
    --
  • Venue
    M.D.M. Gardan, Gwalior Road Morena
  • Center Phone
    09691557798
  • Center Email
    --
  • Subject/Topic/Theme
    Adhyatmik Shri Mad Bhagwat Geeta ( Shrimad Bhagwad Gita Program (Azadi Ka Amrit Mahotsav) )
  • Speaker
    BK Krishna, BK Deepa, BK Rukmani, BK Niketa, BK Priyanka, BK Hari, BK Neetesh
  • Guests
    Sundar Lal Purb (BJP Mantri), Rambabu Gupta (Bussinesmen)
  • Beneficieries
    5000
  • Audience Type
    --
  • Links
    --
  • Program Brief
    प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की ब्रह्माकुमारी पाठशाला विक्रम नगर मुरैना मैं बाघ वौहरे हनुमान के द्वारा आध्यात्मिक श्रीमद्<br/>भगवत गीता ज्ञान यज्ञ का सात दिवसीय कार्यक्रम आयोजन एम.डी.एम .गार्डन विक्रम नगर में किया गया। जिसमें आज दूसरे दिन राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी कृष्णा दीदी जी ने बताया, कैसे आज हर एक मानव अपने वास्तविक स्वरूप को भूल गया है। अपने को देह समझ अपने आंतरिक गुणों शक्तियों का हनन कर दिया ,जबकि वास्तविक रूप में हम सभी देह नहीं एक चेतन शक्ति आत्मा है। <br/>संसार में भगवान से प्रीत करने वाले 5% लोग ही होंगे , जो सच्चे दिल से ईश्वर से प्रीत करते हैं, वही धर्म पक्ष का वाचक हैं और वही फिर पांडव हैं । पांच पांडव हुए ,जिसमें युधिष्ठिर- आध्यात्मिक व्यक्तित्व वाला ,युद्ध जैसी परिस्थिति में भी स्थिर बुद्धि , सद्बुद्धि, संतुलित बुद्धि रहे, उसको ही युधिष्ठिर कहेंगे। दूसरे हैं भीम -आत्म शक्ति से संपन्न , जिसके पास आत्मबल है इसके सामने कोई भी परिस्थिति ठहर नहीं सकती । तीसरा है अर्जुन , जिसमें अर्जन करने का भाव है, भगवान ने जो कहा उसने `हां जी` करके उसे स्वीकार किया ,फिर उसे कर्म में लाया | चौथा नकुल जो नियमों में चलने वाला सिद्धांतवादी व्यक्ति । पांचवा सहदेव, जो हर कार्य में अपना सहयोग देता हो- यह पांच पांडव ।अगर हम चाहें तो पांडवों के गुण धारण कर धर्म के पक्ष के तो बन ही सकते हैं ।ऐसे ही कौरव थे जो अधर्म पक्ष का वाचक है , जो परमात्मा के विपरीत बुद्धि है,कौरवो के नाम की शुरुआत ही ` दु` उपसर्ग से होती है जैसे दुर्योधन- जो धन को बुरे कार्य में लगाने के लिए तैयार है उसका दुरुपयोग करता है, दुशासन- जिसके जीवन में अनुशासन नाम की चीज ही ना हो, दुर्मुख, दुकणऺ, दुर्विमोचन , दुष्कर्म, दुशंला इनके मन के अंदर कहीं ना कहीं दुष्टता का भाव है जो दूसरों को दुख देना चाहते हैं , वही अधर्म पक्ष और कौरव पक्ष का वाचक है। ऐसे समय पर मानव जाति को इस संघर्ष में गीता ज्ञान की अत्यधिक आवश्यकता है ,यह बात समझाते हुए आज कथा में चैतन्य देवियों की लीला भी दिखाई गई, जिसमें नन्हे बाल कलाकारों ने प्रस्तुति भी दी।
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